गले पड़ी दुविधायें हैं

अफवाहों की

धुंध घनी है

डूबी सभी दिशायें हैं,

धुआँधुआँ से

इस मौसम की

शातिर बहुत हवायें हैं!

 

स्याह सफेद

समझ रहा है

क्या झूठा क्या सच्चा है,

ऊपर से दिखता

सपाट जो

वही दे रहा गच्चा है

कौन दाहिने बाँयें है!

 

चोला बदल रही

बदल रही दुनिया की पहचानें हैं,

गड्डमगड्ड

हो रहे चेहरे

सब जाने अनजाने हैंय

बदलेबदले

सर्वनाम सब

बदल गयीं संज्ञायें हैं!

 

नीम अँधेरे के

चंगुल में

कब से फँसा सबेरा है,

जिधर कहीं भी

नजर घुमाओ

दीपक तले अँधेरा हैय

आये थे

संकल्प बोलने

गले पड़ी दुविधायें हैं!

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