कुदरत – शिशिर मधुकर

जिंदगी तू भी जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है
मुझसे नाराज़ हो के मुहब्बत भी दूर जाती है

पतंग और डोर को जैसे भी बांधो साधो तुम
हवायें साथ ना दें तो ये ऊँची ना उड़ पाती है

कुछ रिश्तों को छोड़ा मैंने कुछ ने मुझे छोड़ा
याद हर शख्स की पर हरदम मुझे सताती है

सबके दो चेहरे हैं कातिल बदलती दुनियाँ में
एक माँ ही बस अपनी ममता को निभाती है

कोई नायक है यहाँ कोई बना खलनायक है
ये कुदरत ही मगर सब खेलों को खिलाती हैं

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 21/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/12/2016
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/12/2016
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/12/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/12/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 22/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/12/2016

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