आशा-4…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…..

स्वभाविक सा…सहज सा है…
आशा विश्वास का मेल….
बच्चा माँ बाप का हाथ पकड़ चलता है…
गाड़ियों की भीड़ में से…डर नहीं उसे…
विश्वास के रूप में माँ और बाप हैं साथ…
अंतर्मन की आवाज़ से चलता है…
आशा-विश्वास की…
जो जन्म से मिली है…
प्रविर्ती है हमारी…

जब हम अपनी प्रविर्ती से…प्रकिर्ति से उलट जाते हैं…
तभी असहज होते हैं…अपने से दूर होते हैं हम…
रोज़ की भागदोड़…संगी साथी…हमारे भाव…कर्म…
ये भागती गाड़ियों की भीड़ ही तो है हमारी ज़िन्दगी में…
पर हम बच्चे की तरह सहज नहीं हो पाते…
हम न बच्चों में हैं न बड़ों में….
न किसी को उंगली विश्वास में थमा रहे…
न ही अपनी थाम रहे…
द्वन्द अजीब सा मन में…
अहम का या वहम का…
कारण कुछ भी हो…
पर नुक्सान तो सिर्फ हमारा ही है…
जी नहीं पा रहे हैं हम….
जीने के लिए आशा जीवित रहनी ज़रूरी है…
उंगली थामनी ही होगी…
आशा की…अपने ही विश्वास की…
जो भीतर है हमारे साथ जन्म से ही……
वह तो इंतज़ार में है हमारी…
आओ आलिंगन करें उसका…
वो आह्वान करती है हमारा…
आओ अपनाएं उसे…
दूसरों के सहारे को छोड़…
खुद पे भरोसा करें…
अपनी ज़िन्दगी खुद बनाएं…
खुद ही संवारें…
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/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/12/2016
    • C.M. Sharma babucm 20/12/2016
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 19/12/2016
    • C.M. Sharma babucm 20/12/2016
    • C.M. Sharma babucm 20/12/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/12/2016
    • C.M. Sharma babucm 20/12/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 19/12/2016
    • C.M. Sharma babucm 20/12/2016
  5. mani mani 20/12/2016
    • C.M. Sharma babucm 21/12/2016
  6. आलोक पान्डेय आलोक पान्डेय 20/12/2016
    • C.M. Sharma babucm 21/12/2016

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