तुम हो जहाँ वहीँ मेरा जीवन है। आप में पाया हमने हमने अपना दर्पण है।

आपकी वाहों में अब पूरा समर्पण है
तुम हो जहाँ वहीँ मेरा जीवन है।
आप में पाया हमने हमने अपना दर्पण है।

कमियां दिखती नही हैं जिसमे मेरी ,
नाराज़गियां छुपती नही है जिसमे मेरी ,

प्यार है आपका तो ही मेरा मधुवन है।
आप में पाया हमने हमने अपना दर्पण है।

सुरमा आपकी पलकों पे लयबद्ध हो जाता है।
मेरा दिल आपके प्यार में कुछ ऐसे धड़क जाता है।

सीने में उमड़ती जैसे मीठी सी कोई उलझन है।
आप में पाया हमने हमने अपना दर्पण है।
तुम हो जहाँ वहीँ मेरा जीवन है।

बामोदर तुम्हारे जो सुन रहे हैं मुझको।
चाहत में और भी ज्यादा ढाल रहे हैं मुझको।

तन्हाई नही है प्रिये ,ये प्रेम की अकड़न है।
आप में पाया हमने हमने अपना दर्पण है।
तुम हो जहाँ वहीँ मेरा जीवन है।

मुस्कराहट में मैं आपकी कई सदियाँ जी जाता हूँ।
उदाशी में मैं आपकी गम का प्याला पी जाता हूँ।

तह उम्र साथ गुजारने की अब मेरी हसरत है।
आप में पाया हमने हमने अपना दर्पण है।
तुम हो जहाँ वहीँ मेरा जीवन है

धड़कन का आपकी ,मेरी सांसों संग अनुनादन है।
आपकी चाहत का मेरे सीने में हो रहा अभिवादन है।

भावनाओं में डूबना अब मेरी फितरत है।
आप में पाया हमने हमने अपना दर्पण है।
तुम हो जहाँ वहीँ मेरा जीवन है।

रचनाकार -प्रेम कुमार गौतम

6 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 17/12/2016
    • premkumarjsmith premkumarjsmith 05/01/2017
  2. babucm babucm 17/12/2016
    • premkumarjsmith premkumarjsmith 05/01/2017
    • premkumarjsmith premkumarjsmith 05/01/2017

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