“पिता”

“आज पिता बनकर ये एहसास हुआ ये जाना है,
आज पिता को हमने क्या समझा है क्या माना है
कितना सताया पापा को बचपन में एक खिलोने को,
आज उनकी विवशता को नजदीक से पहचाना है”
आज पिता बनकर ये ……..
“पास में ना था पैसा ओर हम ज़िद पे ज़िद करते रहते थे,
वो पिता थे जो फिर भी एक बार ना कुछ भी कहते थे
दिन भर मेहनत कर कर के जो कुछ भी कमाया जाता था,
शाम ढ़ले वो ज़िसकी ज़िद थी खिलोना घर आता था”
बच्चो की खुशियों की खातिर हँस हँस के कष्ट उठाना है
आज पिता बनकर ये ………
“आज यही कहना चाहूँ पिता से दुनिया सारी है,
अब तक किया सबकुछ उन्होने अब हमारी बारी है
एक पिता का इससे ज्यादा क्या कभी भी मन चाहे,
बस उसका बेटा उसके बुढ़ापे का सहारा बन जाये”
उनका हर सपना अब हमको पूरा कर दिखलाना है
आज पिता बनकर ये ……….

 


(विवेक बिजनोरी)

12 Comments

  1. M Sarvadnya M Sarvadnya 14/12/2016
    • Vivek Sharma vivekbijnori 14/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir 14/12/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/12/2016
    • Vivek Sharma vivekbijnori 14/12/2016
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 14/12/2016
    • Vivek Sharma vivekbijnori 14/12/2016
  5. mani mani 14/12/2016
    • Vivek Sharma vivekbijnori 14/12/2016
  6. babucm babucm 14/12/2016
  7. आलोक पान्डेय आलोक पान्डेय 16/12/2016

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