अजन्मी

वो अजन्मी थी
अनजान थी
अपने होने के एहसास से अनभिज्ञ थी
वो अपने माँ के गर्भ में थी
नयी दुनिया में आने को आतुर थी
जीवन का संगीत सुनना चाहती थी
पिता की उँगलियाँ थाम,
वो चलना चाहती थी
माँ की लोरियाँ सुनते हुए
वो सोना चाहती थी
वो नहीं जानती थी
की वो अभी अजन्मी थी
और उसे अजन्मी ही रहना था
उसका पिता उसकी ऊँगली नहीं थामना चाहता था
उसकी माँ उसे लोरियां ना सुनाने को विवश थी
वो लाचार थी अपना बचपन जीने को
वो अजन्मी थी
शायद इसलिए उसे मारने का प्रयास चल रहा था
उनलोगों के माध्यम से
जिनका अस्तित्व एक औरत के कारण हीं तो था
क्या सिर्फ इसलिए
की
वो अजन्मी थी—–अभिषेक राजहंस

5 Comments

  1. M Sarvadnya M Sarvadnya 14/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/12/2016
  3. C.M. Sharma babucm 14/12/2016
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 14/12/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/12/2016

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