हवा ये कैसी चली है-गीत-मनिंदर सिंह “मनी”

हवा ये कैसी चली है,
हवा ये कैसी चली है,

मर रही इंसानियत,
लाजो शर्म भूला हर कोई,
देख औरो की ख़ुशी,
रोने की रीत, ये कैसी चली है,

हवा ये कैसी चली है,
हवा ये कैसी चली है,

सोचे सब अपना अपना,
मुख से बोले मीठे बोल,
घोपे पीठ में खंजर,
प्रेम की प्रीत, ये कैसी चली है,

हवा ये कैसी चली है,
हवा ये कैसी चली है,

लग रही जमीर की बोली,
सज रही इज़्ज़ते बाज़ारो में,
बेगैरत हुई सोच सभी की,
तिजारत की चाल, ये कैसी चली है,

हवा ये कैसी चली है,
हवा ये कैसी चली है,

सब के अंदर है खुदा,
अंदर झाँक, देखता कोई नहीं,
हर किसी में, मंदिर-मस्जिद,
बनाने की होड़, ये कैसी चली है,

हवा ये कैसी चली है,
हवा ये कैसी चली है,

मनिंदर सिंह “मनी”

12 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/12/2016
    • mani mani 12/12/2016
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/12/2016
    • mani mani 12/12/2016
  3. babucm babucm 12/12/2016
  4. mani mani 12/12/2016
  5. M Sarvadnya M Sarvadnya 12/12/2016
    • mani mani 13/12/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/12/2016
    • mani mani 13/12/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 13/12/2016
    • mani mani 14/12/2016

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