मन….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

मन गोरी का महकता, कमर मटकत नाहीं….
राख गगरी सर उसने, कमर लियो मटकाए….
कमर लियो मटकाए, सब ससुरा पागल भयो…
होश बिसरि देखि जो, घरवाली ने धर लियो….
कह ‘चन्दर’ कविराय, जो किया है वो भुगतो…
चाहे घर सुख चैन, न भटका तू बाहर मन…
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/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

6 Comments

    • C.M. Sharma babucm 13/12/2016
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/12/2016
    • C.M. Sharma babucm 13/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/12/2016
    • C.M. Sharma babucm 13/12/2016

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