सम्पूर्ण कर जाओ – शिशिर मधुकर

तन्हा बैठा हूँ ख्वाबों में अब तुम भी चले आओ
अपने पैरों की आहट से तार मन के खनकाओ

तुम आते हो मेरा चेहरा खुशियों से दमकता हैं
अँधेरों को मिटाने वाली वही तुम रोशनी लाओ

तेरी खातिर ही तो मैंने सभी बंधन को तोड़ा था
सब डर छोड़ अब मुझको तुम भी तो अपनाओ

धरा पर झुकती हैं शाखें ज्यों ही बौछार पड़ती हैं
स्नेह बारिश की मानिंद तुम मुझ पर बरस जाओ

मेरी जान जान लो मधुकर तुम्हारे बिन अधूरा है
मिला के अपनी सांसो में मुझे सम्पूर्ण कर जाओ

शिशिर मधुकर

11 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 09/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/12/2016
      • C.M. Sharma babucm 09/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/12/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/12/2016
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/12/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/12/2016

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