खत

khat-1
मन की गहराइयों से यादों की पुरवाइयों में
ठहरे हुए वक़्त की अनकटी तन्हाइयों में
कोरे कागज़ पर दफ़न ख्वाबों की स्याही से
बंद लिफाफे में पड़ा है उनकी रुसवाइयों में ।

(इमेज पढने में दिक्कत हो तो ब्लॉग पर जाएँ)

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 08/12/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 08/12/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/12/2016
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/12/2016
  5. C.M. Sharma babucm 09/12/2016
  6. C.M. Sharma babucm 09/12/2016

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