हिन्द धरा—डी के निवातिया

ये हिन्द धरा है शेरो की
मत इस पर तुम प्रहार करो
ये पावन धरा है देवो की
इसे शीश झुका प्रणाम करो !!

ये देखो हिन्द हिमालय से
दुनिया का मस्तक दिखता है
है धन्य जन हर जीव यंहा
इस पुण्य धरा पे जीवन पाता है !!

ये देखो खूबसूरती कश्मीर की
जिसको जन्नत से जाना जाता है
सुंदरता में जिसका कोई सानी नही
हर कोई वादियो में खिंचा चला आता है !!

बात ना पूछो तुम कन्याकुमारी की
यंहा कुदरत के करिश्मो की कहानी है
कला, संस्कृति, सभ्यता का प्रतीक ये
सूर्योदय से सूर्यास्त तक सब मनोहारी है !!

कर गुणगान जितना भी
इसके लिए सब कम पड़ता है
आकर हर इंसान यंहा पर
गौरव का अनुभव करता है !

धन्य हो वो प्रत्येक प्राणी,
जिसने जीवन यंहा पर पाया है
करो वंदन प्रभु का हर पल
ले जन्म स्वर्ग सुख धरा पर पाया है !!
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डी के निवातिया

 

 

 

 

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/01/2017
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/01/2017
  2. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 23/01/2017
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/01/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/01/2017
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/01/2017
  4. babucm babucm 24/01/2017
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/01/2017

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