कवच – शिशिर मधुकर

नफ़रत जो कोई मुझसे इतनी अधिक करता है
अपनी कमजोरियों से शायद वो बहुत डरता है
मुहब्बत ने जहाँ में ना कभी कोई घर गिराया है
इससे तो बिगडा हुआ कल भी सदा संवरता है

मेरा सहयोग भुला जो अब मुझे बुरा कहता है
उसको अंदाजा नहीं कवच क्या क्या सहता है
ये मेरे निश्छल से अगाध स्नेह का ही नतीजा है
जो प्रताडित था कभी अब सर उठा के रहता है

मैं भी उसकी तरह जो गाली पर उतर आऊँगा
चाह कर भी कभी फ़िर सुख चैन मैं ना पाऊँगा
जिसका सम्मान बचाया है मैंने इतनी शिद्दत से
कैसे खुद से मैं उसकी मुस्कुराहट को मिटाऊँगा

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/12/2016
  2. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 03/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/12/2016
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 03/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/12/2016
  4. babucm babucm 03/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/12/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/12/2016

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