जिन्दगी एक स्लेट

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काश ज़िन्दगी भी
एक स्लेट होती
जब चाह्ता लिखा
हुआ पोछ्ता
और नया लिख लेता
चलो ज़िन्दगी ना सही
मन ही सेलेट होता
पोछ सकता , मिटा सकता
उन जज्बातो को
जो पुराने हो गये हें
पर ज़िन्दगी की चाक तो
भगवान के पास है
और मन पर पणी लकीरं हों
या सेलेट पर पणी खुंरसटे हों
धोने या पोछने से
नहीं हट्ती नहीं मिटती
पूरानी पर गयी सेलेट को
बदलना पड़ता है
विवश मन को
भुलाना होता है…

कपिल जैन

6 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 02/12/2016
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 02/12/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/12/2016
  4. babucm babucm 03/12/2016
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/12/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/12/2016

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