शाम ।

वक़्त से पहले ही, बुझ जाती है शाम, उन ग़रीबों की,
रोज़ी देने वाले अमीर, जब से ख़ुद ही ख़ुदा बन गए…!

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०१ डिसम्बर २०१६.

sham

4 Comments

  1. babucm babucm 01/12/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/12/2016
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/12/2016
  4. mani mani 02/12/2016

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