बचपन (विवेक बिजनोरी)

” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है,
कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है”
माँ का अपने हाथों से रोटी खिलाना भूख में,
पापा की वो सारी परियों की कहानी याद है
” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है,
कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है”
भूल कैसे सकता हूँ “बचपन” की यादों को भला,
हर नींद मेरी मुझको माँ के आँचल में आनी याद है
” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है,
कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है”
अब देखता हूँ अपने पास सब ऐशो-आराम हैं,
रात को रौशनी के लिए वो डिबिया जलानी याद है
” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है,
कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है”
दिन थे सबसे अच्छे वो जो खो गए जाने कहाँ,
तख्ती, कलम, स्याही सभी बात पुरानी याद है
” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है,
कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है”
विवेक कुमार शर्मा

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/11/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/12/2016
  3. babucm babucm 01/12/2016
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/12/2016

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