माँ की सीख….-पियुष राज

बेटी को विदा करते वक़्त माँ अपनी बेटी को सीख दे रही की ससुराल में कैसे रहना है ,किन,किन बातों का ध्यान रखना है ,उसी पर आधारित है यह कविता ।

माँ की सीख

जिस घर में पली-बढ़ी
अपने मम्मी-पापा की नन्ही कली
बनकर आज दुल्हन
अपने पिया के घर चली

बेटी को विदा करते वक़्त
माँ दे रही है सीख
ताकि ससुराल में बेटी
हमेशा रहे ठीक

जा रही तू बेटी
हम सबको छोड़ कर
आज से पिया का घर ही
है तेरा अपना घर

जाकर उस घर में
जीत लेना सबका मन
अपना फ़र्ज़ निभाना
एक आदर्श बहू बन

सास के रूप में मिलेगी
तुम्हे तुम्हारी माँ
ससुर के रूप में मिलेंगे
तुम्हे तुम्हारे पिता
भाई जैसे मिलेंगे
तुम्हे प्यारे से देवर
थोड़े से सहने पड़ेंगे
तुम्हे ननद के तेवर

सास-ननद कुछ कह भी दे
तो दिल से तुम ना लगाना
अच्छी बहू बनकर
बस अपना फ़र्ज़ निभाना

अपने से बड़ो का
करना हमेशा सम्मान
अपने प्यारे पति का
रखना हमेशा ध्यान

पति को कभी कुछ
बुरा नही तुम कहना
वहीँ तो है तेरे
सबसे अनमोल गहना

ये सारी बातें तुम
रखना हमेशा याद
आशीर्वाद है तेरी माँ का
हमेशा रहोगी आबाद …।

पियुष राज,दुधानी,दुमका,झारखण्ड ।
उम्र-17 साल
(Poem. No-37) 28/11/2016 9:00PM
MOB-9771692835 bhi

6 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/11/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/11/2016
  3. vijay kumar Singh 29/11/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/11/2016
  5. C.M. Sharma babucm 29/11/2016
  6. पियुष राज पियुष राज 30/11/2016

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