लड़ी प्रश्नों की

नयन कटोरे भर भर आएँ

जब जब कान्हा तेरी याद सताए

हल्की सी जो झलक दिखा दी

प्यार की तूने अलख जगा दी

अब याद उस पल को करती हूँ

जब शंका तूने सारी मिटा दी

शक्ति का भण्डार है तू

सबका पालनहार है तू

बरसी थी तेरी कृपा कुछ ऐसे

टूट  थी लड़ी प्रश्नों की जैसे

चंचल मन ठहर सा गया था

पल में सब बदल सा गया था

जी चाहा ठहर जाऊँ वहीं मैं

पूर्णता का अहसास मिला था

था अहोभगय तेरे द्वार मैं आयी

नहीं तो रहती सदा भरमायी

बस कृपा इतनी कर देना कान्हा

रहे सूरत तेरी  नयनों में समायी

 

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/11/2016
  2. babucm babucm 28/11/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 29/11/2016
  3. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 28/11/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 19/12/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 28/11/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 29/11/2016
  5. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 29/11/2016
  6. vijay kumar Singh 29/11/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 10/01/2017

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