मुझे स्वर्ग सा महसूस होता है

मुझे स्वर्ग सा महसूस होता है ,
आपकी यादों में डूबता हूँ जब भी।
मेरा दिल वाग वाग करता है ,
आपके मन को स्पर्श करता हूँ जब भी।
ये नयन कितना व्याकुल होता है,
आपके तन का दर्श करता हूँ जब भी।
ये मेरा शरीर कितना बेफिक्र सोता है ,
सिर आपके घुटनो पर रखता हूँ जब भी।
देखो कितना मुझे फक्रा होता है ,
आपके कन्धों पे हाथ रख कर चलता हूँ जब भी। .
देखो हृदय कितना शांत होता है ,
शाम तले आपकी वाहों में ढलता हूँ जब भी।
कैसे विरह की देखो सुलह होती है ,
आपके हाथों में हाथ हमारा मिलता है जब भी।
नया सा हर रोज जीवन पाता हूँ तुम संग ,
आपका चहरा मुस्कराहट से खिलता है जब भी।
चाहत की रातों में डूब जाता हूँ कितना ,
मेरे चहरे पर आपके केशुओ से आढ़ होता है जब भी।

10 Comments

    • premkumarjsmith premkumarjsmith 05/01/2017
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/11/2016
    • premkumarjsmith premkumarjsmith 05/01/2017
  2. mani mani 26/11/2016
    • premkumarjsmith premkumarjsmith 05/01/2017
  3. C.M. Sharma babucm 26/11/2016
    • premkumarjsmith premkumarjsmith 05/01/2017
  4. कृष्ण सैनी krishan saini 26/11/2016
    • premkumarjsmith premkumarjsmith 05/01/2017

Leave a Reply