क्या है सच और झूठा क्या है

तेरे  चरणों में जब आती हूँ

मैं चैन मन का पाती हूँ

दुनिया मनभावन लाख सही

भरोसा इस पर ज़रा नहीं

रंग हैं  इसके बड़े निराले

तन को मन को लुभाने वाले

पर काली काली भाए मुझको

जितना भी मन शोर मचाले

कह दो कान्हा तुम दूर नहीं

तुम सब हो सकते हो पर मजबूर नहीं

दुनिया रंगों से भर दी तूने

बसी ख़ुशबू हर रंग में तेरी

रंग प्यार का बड़ा निराला

रहे उसमें भी हेरा फेरी

जब मोह भँवर में फँस जाता है

इंसान क्या२ सह जाता है

आशा और निराश में

हर पल उसका बह जाता है

कुछ पाता है कुछ खोता है

मजबूरी हर वो  सह जाता है

जीवन कभी बहुत भाता है

मानो चाँद सितारे पा जाता है

कभी पल ऐसा भी आता है

छीन सब ले जाता है

अब तुम ही बताओ कान्हा प्यारे

क्या है सच और झूठा क्या है

बंद पलकों  में सुंदर सपने

संजोते हैं तो लगते हैं अपने

खुल जाती है आँख ज़रा  तो

जाने कहाँ वो  खो जाते हैं

यह दुनिया तो है माया जाल

जीवन जैसा भी हो ,ढो लेते हैं

चरणों में अब तो लेलो कान्हा

चैन मन को दे दो कान्हा

अब तुम ही बताओ कान्हा  प्यारे

क्या  है सच और झूठा क्या है

 

 

 

 

 

 

 

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/11/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 26/11/2016
  2. babucm babucm 26/11/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 26/11/2016
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 26/11/2016
    • kiran kapur gulati Koran kapur Gulati 26/11/2016
  4. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 26/11/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 26/11/2016
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 26/11/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 26/11/2016
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 28/11/2016

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