मर्ज़ ।

हर मर्ज़ की, एक ही दवा होती है, पीने वालों के पास,
शायद, घुल जाती होगी सहज से, घुट-घुट के मरने की आस..!

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २९ जुलाई २०१६.

marz

6 Comments

  1. babucm babucm 25/11/2016
    • Markand Dave Markand Dave 26/11/2016
    • Markand Dave Markand Dave 26/11/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/11/2016
    • Markand Dave Markand Dave 26/11/2016

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