दीद की चाहत – शिशिर मधुकर

हवाएं चल रही ठंडी ना मुझको नींद आती है
तेरी दीद की चाहत ही बस हर पल सताती है
अगर यूँ रूठ जाना था तो तुम पास क्यों आए
गहरा दर्द होता है जो कोई चुप रह के तड़पाए
वस्ल के वो सभी वादे फ़िर से याद तुम कर लो
भूलकर खौफ सब बस मुझे आगोश में भर लो.

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. babucm babucm 25/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/11/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/11/2016

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