भारत वैभव

जहॉ सभ्यता की शुरूआत हुई हर ओर धरा पर हरियाली,
दया, दान करूणा के सतत् सत्कर्म से फैली रहती है उजियाली
हर क्षेत्र होता पावन पुरातन,बच्चों से बूढो तक खुशहाली,

कुलिन जन मिला करते स्वत्व सदृश जैसे प्रातः किरणों की लाली |

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/11/2016
  2. Markand Dave Markand Dave 24/11/2016
  3. babucm babucm 24/11/2016
  4. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 24/11/2016

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