नोट के तेवर—मुक्तक—डी. के. निवातिया

नोट के तेवर क्या बदले, बहुत कुछ बदल गया !
छोड़ काम धाम इंसान लंबी कतार में ढल गया !!
कल तक तिजोरी में बंद सर चढ़कर बोलता था
वो धन आज गन्दी नालियो में बहता मिल गया !!

!

!

!

डी. के. निवातिया

6 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/12/2016
  2. C.M. Sharma babucm 03/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/12/2016

Leave a Reply