धर्म और इंसान

इंसानियत से बड़ा

धर्म कोई  हो नहीं सकता

कहलाने को इंसान

ज़मीर कभी सो नहीं सकता

धर्म बनाता है कौन

और किस के लिए

दूत इससे बड़ा

कोई हो नहीं सकता

शांति भाईचारा बना रहे

प्यार से बड़ा कोई

धर्म हो नहीं सकता

बस्ती है रूह सब में एक

रंग लहू का भी है एक

फिर दुश्मन इंसान का

इंसान हो नहीं सकता

पर्दा है कोई

यॉ दोष समझ का

हँसाने से बेहतर

रुलाना हो नहीं सकता

है रिश्ता पुराना

सुख और दुःख का

अस्तित्व दुःख का

सुख से बड़ा

हो नहीं सकता

पाने को कुछ

खो देते हैं कुछ

ज़िंदा रहेंगे सदा

यह हो नहीं सकता

तेरे  मेरे का जुनून

बड़ा दुश्मन है शायद

इससे बड़ा दुश्मन

कोई हो नहीं सकता

जाने किस ख़ुमारी में

आज इंसान सोया है

नफ़रत को बुनियाद बनाकर

जाने क्या क्या खोया है

आसार बर्बादी के अयाँ हो रहे हैं

फिर भी चादर तान के सोया है

कहाँ रुकेगी नफ़रत की आँधी

आज बच्चा बच्चा रोया है

बम्ब विस्फोटों से हो कर लैस

कितना हम इतरा रहे

ताक़त हैं  आज़मा रहे

आने वाला कल होगा कैसा

नई  नस्ल क्या काटेगी

प्यार मोहब्बत की जगह

नफ़रतों का बीज बोया है

इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं

आज इंसान धर्मों में ही खोया है

 

 

 

13 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/11/2016
    • kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 23/11/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/11/2016
    • kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 23/11/2016
  3. babucm babucm 23/11/2016
    • kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 23/11/2016
  4. mani mani 23/11/2016
    • kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 24/11/2016
    • kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 24/11/2016
  5. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 23/11/2016
    • kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 24/11/2016
  6. kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 24/11/2016

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