कब तक जिओगे डर के साये में – अनु महेश्वरी

कब तक जिओगे डर के साये में,
दुनियां को देखों बाहर निकल के।
बद्सूरत भी नहीं है उतनी,
तुमने कल्पना की होगी जितनी।
लोग भी बुरे नहीं है उतने,
जितना सोचा होगा तुमने।
ये सच है बुराई की हदे बड़ी है,
पर कब तक जिओगे डर के साये में?
अच्छाई अभी पूरी तरह खतम नहीं हुई है,
जीने का नाम ही ज़िन्दगी है।

एक हाथ बढ़ाकर तो देखो,
मदद के लिए काफी हाथ आगे बढेगे।
अपना दर्द बांटकर तो देखो,
तुम अकेले नहीं हो इस भीड़ में।
औरो का दर्द भी सुनकर देखो,
शायद बहुत छोटा हो तुम्हारा गम।
अपने अंदर की उम्मीद को जगाओ तुम,
ज़िन्दगी बहुत अनमोल है,
ईसे यु डर के साये में जाया न होने दो।
सुबह की सूरज की किरणें,
किसी भी पल मन का अँधेरा दूर कर,
उमंगों और आशाओ से,
जीवन को भर देगी।
बस हिम्मत मत हारना,
हौसला बनाए रखना,
जीने का नाम ही ज़िन्दगी है,
जीने का नाम ही ज़िन्दगी है।

 

“अनु महेश्वरी”
चेन्नई

14 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/11/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/11/2016
  3. mani mani 22/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/11/2016
  4. C.M. Sharma babucm 22/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 23/11/2016
  5. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/11/2016
  6. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/11/2016
  7. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 23/11/2016

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