माँ (ग़ज़ल)………..मनिंदर सिंह “मनी”

अपनी गोद में मुझ को सुला दे आज माँ,
हाथों के दोलन में झुला दे आज माँ,

कदमो की आहट मेरे ढूंढे है तुझे,
है तू कहाँ कोई जुला दे आज माँ,

है हर तरफ घर में उदासी सी अब,
तू बात कोई सी चला दे आज माँ,,

नज़रे सभी की आज है मुझ को घूरती
हर एक नज़र को तू जला दे आज माँ,,

कोई नहीं मुझ को उठाता है सुबह,
आ के मुझे फिर से हिला दे आज माँ,,

है भूख मुझ को तेरे हाथो से खाने की,
रोटी मुझे आ के खिला दे आज माँ,,

मनिंदर सिंह “मनी”

जुला—जवाब,
दोलन—झुला,

14 Comments

    • mani mani 22/11/2016
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/11/2016
    • mani mani 22/11/2016
  2. babucm babucm 21/11/2016
    • mani mani 22/11/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/11/2016
    • mani mani 22/11/2016
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/11/2016
    • mani mani 22/11/2016
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/11/2016
    • mani mani 22/11/2016
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 22/11/2016
    • mani mani 23/11/2016

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