ज़िन्दगी की सच्चाई – अनु महेश्वरी

अचानक आए नोटबंदी के फैसले ने,
ज़िन्दगी के भी कुछ सत्य दिखाए हमे।
रातो रात बंद हो गए बड़े नोट जैसे,
ज़िन्दगी की साँसे कभी भी रुक सकती है वैसे।
जब जीवन के अंत की घड़ी होगी,
कुछ पल की मोहलत भी नहीं मिलेगी।

सोंचे ज़रा जो अब तक जमा किया हमने,
यह सब क्या काम आएंगे।
भौतिक सुविधाएं साथ न चलेगी अपने,
अन्त समय जब आएगा।
अच्छे या बुरे कर्म बस होंगे साथ अपने,
बाकि कुछ न ले पाएंगे।

देर नहीं हुई है अभी,
चेताए अपने अंतरमन को सभी।
बदले हम अपने जीने का तरीका,
जज़्बा बनाए देश के लिए कुछ करने का।
अभिमान और अहंकार का चोला उतारे,
सब के साथ मिल खुशियां बटोरे।

न दौड़े हम खुशियां खरीदने झूठी,
काले धन की तरह यह भी स्थायी नहीं होती है।
सबका भला सोचेने वाले ही,
मरके भी लोगो के दिलो में ज़िंदा रहते है।

 
“अनु महेश्वरी”
चेन्नई

10 Comments

  1. Ritesh Dongare Ritesh Dongare 18/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/11/2016
  2. C.M. Sharma babucm 18/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/11/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/11/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 18/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/11/2016

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