शोर मचाता क्यूँ है….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

इतनी तफ़्सीर तू मुझे आज सुनाता क्यूँ हैं….
कर दे आँखें जो ब्यान दर्द वो छुपाता क्यूँ है….

ख़ुशी हर पल रही दूसरों की काबिज तुम पर….
लेकिन अपनी ही ख़ुशी दाव पे तू लगाता क्यूँ है…..

दिल है सीने में मेरे और होता है बेचैन भी ….
अपना कहके मुझे बेगाना हो सताता क्यूँ है….

है नहीं दुनिया तेरे प्यार के काबिल फिर भी…
प्यार दिलोजान से इनपे तू लुटाता क्यूँ है….

खुदा तो प्यार ही बांटा है लेकिन इंसान…..
दिल को पत्थर और पत्थर देव बनाता क्यूँ है…

बस एक बोल और लिखने के सिवा तुम “चन्दर”….
जब किया है नहीं कुछ, शोर मचाता क्यूँ है….
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/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

तफ़्सीर = विस्तार से बताना

16 Comments

    • babucm babucm 18/11/2016
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/11/2016
    • babucm babucm 18/11/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/11/2016
    • babucm babucm 18/11/2016
  3. Savita Verma 17/11/2016
    • babucm babucm 18/11/2016
  4. Manjusha Manjusha 17/11/2016
    • babucm babucm 24/11/2016
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/11/2016
    • babucm babucm 18/11/2016
  6. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 18/11/2016
    • babucm babucm 19/11/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 22/11/2016
    • babucm babucm 24/11/2016

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