खामोशियाँ

साँसों की हौली सरसराहट,
पेशानी पर शांत पसीने की चमक।
दिमागी उधेड़बुन की ख़ामोशी
रगों में खून की रवानी की धड़क।।

कुछ खामोशियां, तो कुछ शोर
ज़रूरी होते हैं बताने के लिए

की हम हैं…. हम ज़िंदा हैं।।

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/11/2016
  2. mani mani 16/11/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 16/11/2016
  4. babucm babucm 16/11/2016
  5. Saviakna Savita Verma 17/11/2016
  6. Manjusha Manjusha 17/11/2016

Leave a Reply