आपको क्या पता,आपको क्या खबर

हम है तन्हा इधर,आप हो बेफिकर,
नींद आई नही आज भी रात भर,
हाल क्या है हमारा इश्क मे आपके,
आपको क्या पता,आपको क्या खबर।
आपको क्या पता,आपको क्या खबर।।

पतझड़ के दरख्तों सी हालत है,
शोर करते परिंदों सी हालत है,
ना मिली आप हमको तो मर जाएँगे,
जैसे जिस्म को जाँ कि जरूरत है,

हम भी जी जाएँगे साथ दे दो अगर,
है मुमकिन नही आपके बिन सफर,

आपको क्या पता,आपको क्या खबर।
आपको क्या पता,आपको क्या खबर।।

आँखों का ये काजल, क्या बात है,
पंखुड़ि दो लबों की,क्या बात है,
वो बड़े बेफिकर है क्या बात है,
जैसे तितली बगीचे मे आजाद है,

खुबसूरत हो इतनी फिक्र होती है हमको,
कहीं आइने की ही लग ना जाये नजर,

आपको क्या पता,आपको क्या खबर।
आपको क्या पता,आपको क्या खबर।।

इस शहर की गजल आपका नाम है,
आपके ही तो चर्चे सुबह शाम है,
होंगे आशिक कई कोई हमसा नहीं,
नाम से आपके हम भी बदनाम है,

हमने तय कर लिया,खुद से वादा किया,
आपको यूं ही चाहेंगे सारी उमर,

आपको क्या पता,आपको क्या खबर।
आपको क्या पता,आपको क्या खबर।।

कुछ यादें सुलगने लगी होगी अब,
ये आँखे छलकने लगी होगी अब,
मै वहीं पर हुँ जहाँ छोड़कर थे गये,
कुछ मंजर पलटने लगी होगी अब,

जहाँ मांगा था मैने तुमको तुम्हीसे,
ये वही रास्ता है ये वही है शहर,

आप को क्या पता,आप को क्या खबर।
आप को क्या पता आप को।क्या खबर।।

“शायर शशाँक हिरकने”

5 Comments

  1. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 15/11/2016
  2. mani mani 15/11/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/11/2016

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