रुसवाई में तुम “” “””””””सविता वर्मा


जगती आँखों के कोरो में
सोती आँखों की अलसाई में तुम
हममें हम नहीं से पर हमारी परछाई में तुम
होठों से नाम लेते, जो होगी हमारी, रुसवाई में तुम
सम्भालना चाहा दिल को पर नहीं सम्भाल पाये कसमसाई में तुम
झलकती आखें, उखड़ती सासें, पर नहीं चाहिए जगहसाई में तुम
कर लेंगे दिल को तंग, बेजार होंगी सासें, रहना मेरे आस पास पुरवाई में तुम

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/11/2016
  2. babucm babucm 14/11/2016
  3. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 15/11/2016
  4. mani mani 15/11/2016

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