आहत है मन – अनु महेश्वरी

थोड़ी सी पड़ेशानी क्या हुई,
सब ने शिकायत शुरू करदी?

चंद घण्टे लाइन में खडे होने से, हुए पड़ेशान हम जो,
क्या आज़ादी मिल पाती, यही मानसिकता तब होती तो?

जिन्होंने काले धन को, मुद्दा कभी बनाया था,
आज वो भी विरोध कर रहे, इस फैसले का ?

वैसे देखने को ये मिला, आम लोग पड़ेशान कम है,
आम से जो “खास” हुए, उन्हें पड़ेशानी ज़्यादा है।

आज मन मेरा पूछने को मजबूर हुआ,
हम पहले तय करले, हमे चाहिए क्या?

अपनी मानसिकता बदले और सोचे ज़रा हम,
आनेवाली पीढ़ी को कैसा देना चाहते भारत हम?

स्वच्छ एवं काला धन मुक्त भारत बनाने में,
शिकायते छोड़ जिससे जितना हो योगदान दे।

“अनु महेश्वरी”
चेन्नई

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/11/2016
  2. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 11/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/11/2016
  3. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 11/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/11/2016
  4. babucm babucm 11/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/11/2016
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 13/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 14/11/2016

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