गरीब-गरीब अमीर-अमीर……मनिंदर सिंह “मनी”

पुराने नोट बंद हो गए,
नए नोट शुरू हो गए,
हुई कुछ परेशानी पर,
धीरे धीरे सब संभल गए,
कुछ ने जला दिए नोट,
कुछ फेंक निकल गए,
कमाया था नहीं, ऐंठे थे,
फिर ऐंठने निकल गए,
थमी है अब कालाबाज़ारी,
पर सब कहते ही रह गए,
बोगस बिलिंग, जमाखोरी,
कर चोरी से नोट मिल गए,
हो रहा धीरे धीरे घाटा पूरा,
सोच सभी के दिल खिल गए,
चलने लगा वही काला दौर,
जहाँ से फिसले वही मिल गए,
अजी साहब क्या हुआ फिर,
अरबो में से करोडो जल गए,
वक्त के साथ साथ सभी के,
फिर से खाली गल्ले भर गए,
कहीं जुमला बन ना रह जाये,
कर चोरी लोग फिर से कर गए,
नए कठोर कानून बना के,
कर चोरी से बचाना होगा,
हर व्यक्ति को अपना फ़र्ज़ निभा,
देश धर्म की राह पर चलना होगा,
वर्ना “मनी” कल भी हालात वही होंगे,
गरीब-गरीब अमीर-अमीर होगा,

मनिंदर सिंह “मनी”

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/11/2016
    • mani mani 11/11/2016
  2. babucm babucm 11/11/2016
    • mani mani 12/11/2016
    • mani mani 12/11/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 11/11/2016
    • mani mani 12/11/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/11/2016
    • mani mani 12/11/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 12/11/2016
    • mani mani 16/11/2016

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