तेरे लिये “माँ” —कविता—डी. के. निवातियाँ

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तेरे लिये “माँ”

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

ईश्वर का साश्वत रूप है माँ
मत्तव का अपार सागर माँ
स्वर्ग समझो उस आँगन को
जंहा पूजा होती हो तेरी माँ !!

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

त्याग, बलिदान, क्षमा, धैर्य
ममता की प्रतिमूर्ति होती माँ
सब सद्गुण ही तेरे आभूषण
इनसे बनती मेरी पहचान माँ !!

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

तेरे क्रोध में भी करूणा है माँ
तेरे मौन में भी ममता है माँ
जीवन के हर एक मोड़ पर
संतान को सहारा देती है माँ !!

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

सब कुछ मिल जाता दुबारा
एक तुम नहीं मिलती हो माँ
पूछे मुझसे नाम मुहब्बत का
मुस्कुरा के कह देता हूँ “माँ” !!

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

आज भले कोई बना हो ज्ञानी
जन्म समय तो था अज्ञानी माँ
कितना कोई करे तेरा त्रिस्कार
फिर भी तूने ह्रदय से लगाया माँ !!

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

मेरे लिये तुम दुर्गा, तुम गोविंद
हरपल रहती हो ह्रदय में जिन्दा
तुम ना होती दुनिया आता कैसे
एक तेरे सहारे मेरी पहचान माँ

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

कितना भी लिखूं तेरे लिये कम है
सच तो ये है “माँ” तुम हो तो हम है
हर रिश्ते में मिलावट देखी हमने
बस तेरी ममता में न छल देखा माँ !!

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

रोते हुए पोंछे थे आंसू तेरे दुपट्टे से
उस दिन छोड़ आया था तुमको माँ
सुना अभी तक नहीं धोया है तुमने
उन यादो को संभाले रखा तुमने माँ !!

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

एक तरफ हो जो तेरा आँचल
एक तरफ भूमण्डल सारा माँ
नहीं चाह मुझे इस भूलोक की
मै चाहूँ तेरे झूल की छाव माँ !!

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

धन दौलत तो हर कोई देता
मुहँ का निवाला तुम देती माँ
दुनिया के सबसे निर्धन प्राणी
जो तेरी स्तुति में करे सोच-विचार माँ !!

कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  !
जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !!

!
!!

!!!

@— डी. के. निवातियाँ —@

 

16 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 09/11/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/11/2016
  2. mani mani 09/11/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/11/2016
  3. mani mani 09/11/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/11/2016
  4. C.M. Sharma babucm 09/11/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/11/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/11/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/11/2016
  6. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 10/11/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/11/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/11/2016
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/11/2016
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 10/11/2016

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