आखों पे पर्दा – अनु महेश्वरी

जब कोई घटना घटती,
टीवी पे खबरें ज़िंदा रहती,
आंदोलनों की हवा है बहती,
धरने प्रदर्षन शुरू हो जाते,
मुआवोजो की घोषणाये होती।
कुछ ही दिनों में आखों पे पर्दा पड़ जाता,
और फिरसे ये हम सबका भ्रम बन जाता।

जब कोई घटना घटती,
हम शोर बहुत मचाते है,
दोषारोपन खूब करते है,
योजनाए बन भी जाती है,
अमल में कम ही आ पाती है।
कुछ ही दिनों में आखों पे पर्दा पर जाता,
और फिरसे ये हम सबका भ्रम बन जाता।

जब कोई घटना घटती,
हमें भी लगने लगता,
इसबार तो हल निकलेगा।
दिल को भी सुकून मिलता,
फिर कही कुछ गलत न होगा।
कुछ ही दिनों में आखों पे पर्दा पड़ जाता,
और फिरसे ये हम सबका भ्रम बन जाता।

काश हम अपनी आँखों से,
पर्दा हटा ही रहने दे।
हल जरूर निकलेगा तब,
घटनाये याद रखेंगे जब।

 

“अनु महेश्वरी”
चेन्नई

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/11/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/11/2016
  3. C.M. Sharma babucm 08/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/11/2016
  4. mani mani 09/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/11/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 09/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/11/2016
  6. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 10/11/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/11/2016

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