दीदार हो तो कैसे हो…..मनिंदर सिंह “मनी”

घूंघट में चाँद मेरा, दीदार हो तो कैसे हो,
कुछ वो शर्माये, कुछ हम, दीदार हो तो कैसे हो,,

दूरियों को मिटाने की चाह दोनों तरफ एक सी,
हिम्मत ना वो जुटा पाए, ना हम, दीदार हो तो कैसे हो,,

कहीं लग ना जाये बुरा, किसी ने कुछ कहा अगर,
सोच ना वो कुछ कह पाए, ना हम, दीदार हो तो कैसे हो,,

मुलाकाते हर रोज हुआ करती थी कभी बेख़ौफ़ सी,
आज जाने क्यों मन बेचैन, दिल घबराये, दीदार हो तो कैसे हो,,

कभी ढूंढा करते थे बहाने दीदार ऐ सूरत को,
ना वो उठाये घूंघट, ना अब हम, दीदार हो तो कैसे हो,,

तड़पती मादक सी प्यास दिलो के दरमियां दोनों के,
ना वो कोशिश करे, ना हम, दीदार हो तो कैसे हो,,

कटार से हैं नैन उसके, और हम कत्ल होने को बेकरार,
ना वो कटार चलाये, ना आगे बढे हम, दीदार हो तो कैसे हो,,

अपने यौवन पर है हमारे मिलन की रात “मनी”,
ना वो घूंघट उठाये, ना हम, दीदार हो तो कैसे हो,,

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/11/2016
    • mani mani 07/11/2016
  2. babucm babucm 07/11/2016
    • mani mani 07/11/2016
  3. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 07/11/2016
    • mani mani 08/11/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 07/11/2016
    • mani mani 08/11/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 07/11/2016
    • mani mani 08/11/2016
    • mani mani 08/11/2016
  6. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 10/11/2016
    • mani mani 10/11/2016

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