पराकाष्ठा….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

मैंने सबका दर्द है उसको सहते देखा….
ज़िन्दगी में छुप छुप्प के है रोते देखा…

जाने किस मिटटी से बनी है वो मूरत….
दर्दे बरसात में ना उसको ढलते देखा….

है जो दिल में वो दिल में ही रह जायेगा….
ज़ख्मों को सीने में दबाते पिरोते देखा….

है आग इतनी के भसम कर दे सारा जहां…
दिल ऐसा खुद को समंदर में डुबोते देखा…

है अजंता की मूरत सी वो दिखती मुझको…
दिल पे पत्थर रख उसको बस हँसते देखा….

हर पल तू इम्तिहान लेता है उसका खुदा..
नाज़ है ‘चन्दर’ को उसपे तुझको धत्ता कहते देखा…
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/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

18 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 05/11/2016
    • babucm babucm 06/11/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2016
    • babucm babucm 06/11/2016
  3. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 05/11/2016
    • babucm babucm 06/11/2016
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/11/2016
    • babucm babucm 06/11/2016
    • babucm babucm 06/11/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 06/11/2016
    • babucm babucm 06/11/2016
  6. mani mani 06/11/2016
    • babucm babucm 06/11/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 06/11/2016
    • babucm babucm 06/11/2016
  8. Ritu 07/11/2016
  9. babucm babucm 07/11/2016

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