अहंकार की आँधी – शिशिर मधुकर

तुमने अहंकार की आँधी में मुझपे वार कर डाला
मेरी इज्जत तो रही दूर बड़ा तिरस्कार कर डाला
सब कुछ भुला सकता हूँ मैं इसे ना भुला पाऊँगा
तेरे प्रायश्चित करे बिना मैं तो पास में ना आऊँगा
अपने सम्मान की खातिर मुझे मरना भी मंजूर है
स्वार्थी और कपटी जन तब ही रहते मुझसे दूर हैं

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 04/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2016
  2. Uttam Uttam 04/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2016
  3. C.M. Sharma babucm 04/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2016
  4. mani mani 05/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2016

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