:::  ले ले रे सेल्फी लेले रे :::

माँ की गोद में आशाओं की लोरी सुनना
टेढ़े मेढे लकीरों से भविष्य की चादर बुनना
कागज़ की पतंग से सितारों के फूल चुनना
उंगली पकड़ कर बादशाहों सा घूमते मेले  रे

ले ले रे सेल्फी लेले रे

सफलता के शृंखलाओं को चूम कर
ऐश्वर्य के सुनहरे रथ पर घूम कर
अभिमान के साकी संग झूम कर
रिश्तों की बारात में रहे अकेले रे

ले ले रे सेल्फी लेले रे

लालच के तूफानों पर हो सवार
धर्म निति न्याय का किया शिकार
आडम्बर के नखरे पाले हजार
जमीर ईमान लेती हिचकोले रे

ले ले रे सेल्फी लेले रे

बचपन बनाया अपनी जवानी को निचोड़
जीवन की संध्या में सब जाते हैं छोड़
संस्कार के सूखे घट को माया न पाई जोड़
उम्मीदों के आंगन में सूनापन खेले रे

ले ले रे सेल्फी लेले रे

करने भलाई निकले ओढ़ कर जिम्मेदारी
प्रजातंत्र की दुहाई से मिली जो उम्मीदवारी
अनैतिकता की गोष्ठी हुई भ्रष्टाचार से यारी
चूहे का जिगर लिए हाथी जैसे चेले रे

ले ले रे सेल्फी लेले रे

प्रियतम के प्रेम का शृंगार कर
यौवन के सौंदर्य को निखार कर
उमंगों को शर्म से निहार कर
समर्पण की बयार घूँघट खोले रे

ले ले रे सेल्फी लेले रे

बस एक किरण से उजाला हो गया
मन की कालिख बह कर खो गया
आत्मा के खलिहान में अमरत्व बो गया
भक्ति के फागुन में आनंद के झूले रे

ले ले रे सेल्फी लेले रे

10 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 03/11/2016
    • Uttam Uttam 03/11/2016
  2. mani mani 03/11/2016
    • Uttam Uttam 04/11/2016
  3. babucm babucm 03/11/2016
    • Uttam Uttam 04/11/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/11/2016
    • Uttam Uttam 04/11/2016
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 04/11/2016

Leave a Reply