ठण्डी आह – शिशिर मधुकर

जो नहीँ किस्मत में मेरी उसकी मुझे क्यों चाह दी
चलने की हसरत दी जिंदगी पर नहीँ कोई राह दी

रास्ता जो भी बनाया मैं शांत हो के उस पर चला
तूफां में मगर मुझको किसी ने ना कोई पनाह दी

जिनको मैंने भगवान समझा वो असल शैतान थे
शातिरो ने अपनी नफरत की पर मुझे ना थाह दी

मैंने सभी टूटो को थामा और ना उन्हे गिरने दिया
पर किसी ने मुझको बचाने को ना अपनी बाँह दी

मधुकर के जीवन में जब सुख का ना कोई दौर है
ऐ खुदा उसके सीने में तूने क्यों ना ठण्डी आह दी

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 03/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/11/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 03/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/11/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 03/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/11/2016
  4. babucm babucm 03/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/11/2016
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 04/11/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/11/2016

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