तुम्हें न भूल पाते हैं

हम खामोश है मगर तुम्हें भूल न पाते हैं
दिल से सदा देकर तुम्हीं को तो बुलाते हैं।

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और तो क्या करें दुनिया के रिवाजों का,
आओ मेरे यार इनकी होली जलाते है।

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इन दीवारों को कभी तो गिरना है ही,
हम दोनों मिलकर ये दूरी मिटाते है।

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नफ़रत के आगोश में जी लिए जिन्हें जीना था,
हम तो खुशबु-ए-इश्क़ की हवा चलाते है।

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मत रहो उदास इन हसीन लम्हों के दरमियान
थोड़ा तुम मुस्करा दो थोड़ा हम मुस्कराते है।

8 Comments

  1. mani mani 02/11/2016
    • vinod kumar dave vinod kumar dave 02/11/2016
  2. babucm babucm 02/11/2016
    • vinod kumar dave vinod kumar dave 02/11/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/11/2016
  4. vinod kumar dave vinod kumar dave 02/11/2016
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 02/11/2016
    • vinod kumar dave vinod kumar dave 03/11/2016

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