::: लक्ष्मी का आगमन :::

क्यों आती हो तुम अमावस्या की रात
जब चाँद तुम्हें इतना प्यारा है
कैसे करें तुम्हारे दर्शन की आस
चारों ओर अभी अंधियारा है

कहते हैं कि उल्लू पर तुम आती हो
हन्स पर बैठी बहना से इतराती हो
अहंकार को क्यों जनती तुम फिर
माना कि निराला रूप तुम्हारा है

मंगलमयी, विघ्नहर्ता के संग आ जाओ
मन प्रांगण को भक्ति दीपों से सजा जाओ
सूरज की रोशनी में वो तेज नहीं
आत्म उत्सर्ग का प्रकाश चौंधियारा है

धन्य हुआ मैं प्रेम धन मिला जब से
खनक शांति-पैरों की सुनी है तब से
कर्म यज्ञ में दम्भ की आहुति दे कर
आलोकित सुखी संसार सारा है

हृदय-अयोध्या में राम का आगमन हो
रावण का हर जीवन में दमन हो
आशा प्रदीप की ज्योति बनी रहे सदा
तेरे चरणों में अर्पित शीश हमारा है

  –  उत्तम टेकडीवाल.

8 Comments

    • Uttam Uttam 03/11/2016
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/10/2016
    • Uttam Uttam 03/11/2016
  2. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 31/10/2016
    • Uttam Uttam 03/11/2016
  3. C.M. Sharma babucm 01/11/2016
    • Uttam Uttam 03/11/2016

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