नए मील का पत्थर

इस महान विभूति ने अपने इकसठवें जन्मदिवस के अवसर पर यह कविता भी लिखी थी

  नए मील का पत्थर पार हुआ।

कितने पत्थर शेष न कोई जानता?

अन्तिमनए मील का पत्थर पार हुआ।

कितने पत्थर शेष न कोई जानता?

 अन्तिम कौन पडाव नही पहचानता?

अक्षय सूरज , अखण्ड धरती,

 केवल काया , जीती मरती,

 इसलिये उम्र का बढना भी त्यौहार हुआ।

नए मील का पत्थर पार हुआ।

बचपन याद बहुत आता है,

यौवन रसघट भर लाता है,

बदला मौसम, ढलती छाया,

रिसती गागर , लुटती माया,

 सब कुछ दांव लगाकर घाटे का व्यापार हुआ।

 नए मील का पत्थर पार हुआ।

कौन पडाव नही पहचानता?

अक्षय सूरज , अखण्ड धरती,

केवल काया , जीती मरती,

 इसलिये उम्र का बढना भी त्यौहार हुआ।

नए मील का पत्थर पार हुआ।

बचपन याद बहुत आता है,

यौवन रसघट भर लाता है,

बदला मौसम, ढलती छाया,

रिसती गागर , लुटती माया,

 सब कुछ दांव लगाकर

घाटे का व्यापार हुआ।

नए मील का पत्थर पार हुआ।

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