*इस बार दिवाली सीमा पर*

*इस बार दिवाली सीमा पर*

…आनन्द विश्वास

इस बार दिवाली सीमा पर,

है खड़ा  मवाली  सीमा पर।

 

इसको  अब  सीधा करना है,

इसको अब  नहीं सुधरना है।

इनके  मुण्डों  को  काट-काट,

कचरे के संग फिर लगा आग।

 

गिन-गिन कर बदला लेना है,

हम  कूँच  करेंगे  सीमा  पर।

 

ये  पाक  नहीं,  ना पाकी  है,

चीनी, मिसरी-सा  साथी है।

दोनों की  नीयत  साफ नहीं,

अब करना इनको माफ नहीं।

 

इनकी  औकात   बताने  को,

हम, चलो  चलेंगे सीमा पर।

 

दो-चार  लकीरें   नक्शे  की,

बस  हमको  जरा बदलना है।

भूगोल  बदलना   है   हमको,

इतिहास स्वयं लिख जाना है।

 

आतातायी का  कर  विनाश,

फिर धूम-धड़ाका सीमा पर।

…आनन्द विश्वास

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/10/2016
  2. mani mani 28/10/2016
  3. C.M. Sharma babucm 28/10/2016
  4. Manjusha Manjusha 28/10/2016
  5. Kajalsoni 29/10/2016
  6. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 29/10/2016

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