कोई है शख़्स जो मेरा अपना साया है

कितने अरमान दिल में छुपा लाया हैं,
कोई है शख़्स जो मेरा अपना साया है।
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उसकी कमसिन आँखों ने जब से कहा मुझे पागल,
मेरा दिल-ओ-दिमाग बड़े शौक से पगलाया है।
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वो जब से रूठ गई है मुझसे मैंने ऐसा देखा है,
मेरे गुलशन का फूल-फूल पत्ता-पत्ता कुम्हलाया हैं।
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इतनी नाराजगी मत रख मुझसे मेरे सनम,
दिल भी पूछे मेरा तू अपना है या पराया है।
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नज़र नही हटती मेरी तेरे सुंदर सुंदर चेहरे से,
मैं तो तेरा हो चुका जब तूने गले लगाया है।
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दिल की हर धड़कन पर तेरे इश्क़ का ख़ुमार है,
आँखों के रस्ते से होकर साँसों में तुझे बसाया है।
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तेरे नयनों से मेरे प्यार का रंग कभी न उतरेगा,
तू मेरे रंग में रंगी है जब से तुमको अपनाया है।

12 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
    • vinod kumar dave vinod kumar dave 25/10/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/10/2016
    • vinod kumar dave vinod kumar dave 25/10/2016
  3. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 25/10/2016
  4. vinod kumar dave vinod kumar dave 26/10/2016
  5. babucm babucm 26/10/2016
    • vinod kumar dave vinod kumar dave 26/10/2016
  6. vinod kumar dave vinod kumar dave 26/10/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 26/10/2016
    • vinod kumar dave vinod kumar dave 26/10/2016

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