सुघर सलोने स्याम सुंदर सुजान कान्ह

सुघर सलोने स्याम सुंदर सुजान कान्ह,

करुना-निधान के बसीठ बनि आए हौ।

प्रेम-प्रनधारी गिरधारी को सनेसो नाहिं,

होत हैं अंदेश झूठ बोलत बनाए हौ॥

ज्ञान गुन गौरव-गुमान-भरे फूले फिरौ,

बंचक के काज पै न रंचक बराए हौ।

रसिक-सिरोमनि को नाम बदनाम करौ,

मेरी जान ऊधो कूर-कूबरी पठाए हौ॥

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