‘हमसफर’ (गजलनुमा कविता)

खुदा करे तुझको भी मुझसे प्यार हो जाये
निगाहों से निगाहों में इकरार हो जाये

आँखें बन्द करूँ मैं जब भी अपनी
तेरे चाँद से मुखड़े का दीदार हो जाये

नहीं रह सकता एक पल भी तेरे बिना
तू भी मुझसे मिलने को बेकरार हो जाये

अपनी जान से ज्यादा चाहता हूँ तुझको
मिलकर मुझसे तुझे ये एतबार हो जाये

मिल जाए तू गर किसी को तो वह
बिन पूँजी के ही सरमायदार हो जाये

लरजते हुए लबों से कर दे इजहार गर तू
मेरे दिल की दुनिया भी गुलज़ार हो जाये

रहें साथ जिंदगी के हर मोड़ पर सदा
ए काश तू मेरा हमसफर हो जाये

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/10/2016
    • योगेश कुमार 'पवित्रम' योगेश कुमार 'पवित्रम' 24/10/2016
  2. babucm babucm 24/10/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 24/10/2016
  4. Kajalsoni 24/10/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/10/2016

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