थोरी-थोरी बैस की अहीरन की छोरी संग

थोरी-थोरी बैस की अहीरन की छोरी संग,
भोरी-भोरी बातन उचारत गुमान की ।
कहै रतनाकर बजावत मृदंग-चंग,
अंगन उमंग भरी जोबन उठान की ॥
घाघरे की घूमनि समेटि कै कछोटी किऐं,
कटि-तट फेंटि कोछी कलित विधान की ।
झोरी भरैं रोरी, घोरि केसर कमोरी भरैं,
होरी चली खेलन किसोरी वृषभान की ॥

Leave a Reply