दिवाली कैसे मनाऊँ..?-पियुष राज

दिवाली कैसे मनाऊँ ……?

उस वीर जवान की माँ
कह रही ईश्वर से
जब दिवाली से पहले
बुझ गया घर का दीपक
तो मैं दीप कैसे जलाऊँ
कोख सूनी हो गई मेरी
तो मैं दिवाली कैसे मनाऊँ ?

बेटी कहती पापा से
तुम कहाँ चले गए
कौन लायेगा अब
पटाखे और दीये
अब मैं कैसे
पटाखे ,फुलझड़ी जलाऊँगी
पापा , बिन आपके
मैं, दिवाली कैसे मनाऊंगी ?

बेटा कहता है पापा से
मैं दुश्मनो को सबक सिखाऊंगा
मैं अब रॉकेट नहीँ
पाकिस्तान को बम से उड़ाऊंगा
पापा बिन आपके
मैं ,दिवाली कैसे मनाऊँगा ?

पति के विरोह में
पत्नी नम आँखों से कहती है
जिन हाथो से चूड़ी बिखर गए
उन हाथो से रंगोली कैसे बनाऊँ
बिन साजन के
मैं,घर को कैसे सजाऊँ
जिनके बगैर एक पल भी
जीना था मुश्किल
मैं,उनके बिना
दिवाली कैसे मनाऊँ…… ?

पियुष राज ,दुधानी,दुमका ,झारखण्ड ।
(Poem.No-33) 23/10/2016
Mob-9771692835

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