मेरा ठिकाना–१०—मुक्तक—-डी के निवातिया

सीना ताने खड़ा रहूँ, हर पल दुश्मन हो निशाना
अंत घडी जाये प्राण, लबो पे हो जयहिंद का नारा
चाह नही मुझे किसी, धन दौलत या शोहरत की
देश सेवा में लगा रहूँ सरहद पर हो मेरा ठिकाना ।।



डी के निवातिया_____।।।

18 Comments

  1. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 24/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016
  3. Kajalsoni 24/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016
  4. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 24/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016
  5. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 24/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016
  6. babucm babucm 24/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016
  8. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 25/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016

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